PM Modi ने CAA से लेकर अवैध कालोनियों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा, जानें…

The Nation Talk | Ravinder singh

Wednesday December 4, 2019

अपने जीवन काल में ही एक मिथकीय हीरो बन चुके हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग और चर्चा अक्सर होती रही है लेकिन यह जानना दिलचस्प होगा कि उन्हें यह सम्मान क्यों और कैसे नहीं मिला?

आज मेजर ध्यानचंद की 40वीं पुण्यतिथि है.

2014 में मेजर नई दिल्‍ली जागरण स्‍पेशल। पीएम मोदी ने रविवार कोि दिल्‍ली के रामलीला मैदान में विशाल रेली को संबोधित किया। यह रैली मुख्‍यत दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आयोजित की गई थी। इस रैली में उन्‍होंने हर मुद्दे को उठाया। इसमें जहां उन्‍होंने अवैध कालोनियों को वैध करने पर हुई राजनीति पर लोगों को जानकारी दी वहीं एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून पर भी जनता जवाब दिया। उन्‍होंने इस दौरान विपक्ष और दिल्‍ली सरकार को भी जमकर कोसा। आइये जानें इस रैली से जुड़ी कुछ खास बातें इस रैली की शुरुआत उन्‍होंने ‘विविधता में एकता, भारत की विशेषता’ नारा देकर किया।  

आरटीआई से मिली जानकारियों के मुताबिक 2013 में मेजर ध्यानचंद का बायोडेटा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में कई महीने पहले ही पहुंच चुका था. उस पर पीएम की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन बाद में अचानक सचिन के नाम पर मुहर लगा दी गई.

11 अप्रैल 2011 को भाजपा सांसद मधुसूदन यादव ने केंद्र सरकार से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के लिए नियमों में बदलाव का आग्रह किया था. तब तक यह सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और जनसेवा के क्षेत्र में दिया जाता था, खिलाड़ियों के लिए भारत का शीर्ष सम्मान अर्जुन अवार्ड है.

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